Sign Up
You Punjabi helps you connect and share with the people in your life.

नैशनलिस्ट मोदी का स्वागत करेगा संसार

भारत की रक्षा और विदेश नीति के बारे में मोदी का दृष्टिकोण राष्ट्रीय हितों के सर्वोत्तम संरक्षण पर आधारित है
एक सक्षम प्रशासक के रूप में नरेंद्र मोदी न केवल देशव्यापी फलक पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी स्थापित हो चुके हैं। यह मुकाम उन्होंने कई दिशाओं से हुए जबर्दस्त विरोध का सामना करते हुए हासिल किया है।

अभी हाल ही में ब्रिटेन के जाने-माने अखबार इंडिपेंडेंट में छपे एक खुले पत्र के मार्फत ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में कार्यरत 75 भारतवंशी विद्वानों ने प्रधानमंत्री पद हेतु मोदी की उम्मीदवारी की खुलकर मुखालफत की थी। इससे पहले गार्डियन ने

मोदी को हिंदू राष्ट्रीयतावादी बताते हुए उन्हें 2002 के दंगों

के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

जीत से बदला नजरिया

डेली टेलीग्राफ ने भी उन्हें इसी कारण बहुविवादित नेता बताया। रायटर्स के मुताबिक 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान लंदन विश्वविद्यालय के प्रो. जेम्स मैनोर ने गोधरा दंगों के परिप्रेक्ष्य में मोदी के खौफ का जिक्र किया था। अपनी ताजातरीन खबर में बीबीसी ने भी मोदी को गुजरात के विकास का प्रतीक बताते हुए उन्हें गोधरा दंगों को संभालने में नाकाम बताया है। ब्रिटिश मीडिया के तर्ज पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी राष्ट्रीयतावादी मोदी को विभाजनकारी विपक्ष का अग्रणी नेता बताते हुए उन्हें 2002 के दंगों के लिए जवाबदेह बताया है। इसी पत्र के संडे रिव्यू ने गत वर्ष अक्टूबर के अंत में लिखा कि मोदी का नेतृत्व अमेरिका और उसके सहयोगी देश पाकिस्तान के हितों के अनुरूप नहीं है।

मोदी के प्रति पश्चिमी देशों के रुख में बदलाव की बयार दिसंबर 2012 में गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बहनी शुरू हुई। फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा कि मोदी में चीन से प्रतिस्पर्धा करने की अद्भुत क्षमता है। ब्रिटेन के व्यापारिक समुदाय ने मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को पहले ही परख लिया था। गुजरात विधानसभा में मोदी की शानदार तीसरी जीत के बाद यूरोपीय संघ ने भी मोदी का बहिष्कार खत्म कर दिया। भारतीय अर्थव्यवस्था में गुजरात के योगदान को देखते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने प्रधानमंत्री पद हेतु मोदी की नामजदगी के तीन दिनों के भीतर कहा कि वहां निकट सहयोग के अपार अवसर मौजूद हैं। हाल में राष्ट्रमंडल पत्रकार संघ द्वारा भारतीय चुनावों पर आधारित परिचर्चा में भारतीय मूल के प्रख्यात अर्थशास्त्री लॉर्ड मेघनाद देसाई ने नरेंद्र मोदी के एक सफल प्रधानमंत्री होने की उम्मीद जताई और कहा कि देश को उनके रूप में एक निर्णायक नेतृत्व प्राप्त होगा।

नरेंद्र मोदी की निरंतर बढ़ती लोकप्रियता के मद्देनजर अब उनके प्रति अमेरिकी नजरिये में भी धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। अपने पद से त्यागपत्र देने के पूर्व अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल ने मोदी से भेंट-वार्ता की। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस ने मोदी की उत्तरोत्तर बढ़ती हुई लोकप्रियता को काफी उत्साहजनक बताया है। अमेरिकी दृष्टिकोण में बदलाव का धीमापन इस देश के भारतवंशी सक्रियतावादियों, ईसाई व यहूदी संगठनों, रिपब्लिकन सांसदों और कई प्रख्यात शोध संस्थानों के दबाव का परिणाम है। मोदी-बहिष्कार का माहौल बदलने में गुजरात के विकास क्रम, गोधरा के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम की अनुकूल रिपोर्ट के अलावा हिंदू-अमेरिकी फाउंडेशन, जनरल मोटर्स एवं फोर्ड जैसे व्यापारिक घरानों ने भी योगदान पहुंचाया है। भारत-अमेरिकी व्यापार काउंसिल के अध्यक्ष के अनुसार मोदी में निवेश हेतु चुंबकीय गुण भरे पड़े हैं। हाल में इंटरनेशल न्यूयार्क टाइम्स में छपे एक लेख में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के पूर्व अध्यक्ष एलन बारी ने लिखा है कि मोदी को एक विभाजनकारी नेता के रूप में नहीं बल्कि आधुनिकीकरण के प्रवक्ता के तौर पर देखना चाहिए।

मोदी के बारह वर्षों के मुख्यमंत्रित्व काल से लेकर प्रधानमंत्री पद हेतु उनकी धमाकेदार नामजदगी और उनके तूफानी चुनाव अभियान के आला इंतजामात के चलते भारत के भविष्य पर लगा कुहासा अब छंटने लगा है। भारत की रक्षा और विदेश नीति के बारे में मोदी का दृष्टिकोण भारतीय हितों के सर्वोत्तम संरक्षण पर आधारित है। उनकी इस अवधारणा का उल्लेख बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में भी है जिसे कुछ आलोचकों ने मोदीफेस्टो तक कह डाला है। भारत के हितों को तिलांजलि देकर नकली विश्व-शांति के नेहरूयुगीन खोखले आदर्श को मोदी ने बिलकुल दरकिनार कर दिया है। वे राष्ट्रीय हितों में सौहार्दपूर्वक सामंजस्य स्थापित करना चाहते हैं। चीन तथा पाकिस्तान के बारे में उनका दृष्टिकोण इस कथन की पुष्टि करता है।

राष्ट्राध्यक्ष जैसी छवि

वाहन उद्योग और बुनियादी औद्योगिक ढांचों के निर्माण में गुजरात को जापान और चीन जैसे ताकतवर एशियाई देशों से पर्याप्त सहायता प्राप्त हुई है। मोदी ने मुख्यमंत्री के तौर पर इन देशों की यात्रा की है, मगर उनका स्वागत वहां राष्ट्राध्यक्ष के रूप में किया गया है। उनकी निहायत फलदायी तीसरी रूस यात्रा मास्को स्थित भारतीय दूतावास में एक उत्सव के साथ संपन्न हुई, जिसमें इस लेखक को भी शरीक होने और उनसे मुलाकात करने मौका मिला। अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान मैंने वहां के कुछ श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों जैसे हार्वर्ड तथा प्रिंसटन एवं ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर पीस में भारत विषयक कई सर्वेक्षणों एवं परिचर्चाओं में भागीदारी की है, जहां राजनीतिक पंडितों ने मोदी की फतह की संभावनाएं जाहिर की हैं। राष्ट्रीयतावादी मोदी के कुशल नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय मंच पर शीघ्र ही एक सशक्त भारत की मौजूदगी दर्ज होगी।
   likes this.
All times are GMT +3. The time now is 12:42 pm.